महराजगंज: पारंपरिक खेती के लिए जाना जाने वाला महराजगंज जिला अब मछली पालन (मत्स्य उत्पादन) का बड़ा हब बन रहा है। इस नए कारोबार ने गांवों की अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल कर रख दी है। मछली उत्पादन के मामले में महराजगंज ने उत्तर प्रदेश के कई बड़े जनपदों को भी पीछे छोड़ दिया है।

​1708 तालाबों से 30 हजार टन का बंपर उत्पादन

जिले में इस वक्त करीब 1708 निजी और सरकारी तालाबों (पोखरियों) का इस्तेमाल मछली पालन के लिए किया जा रहा है। इन तालाबों से सालाना लगभग 30 हजार टन मछलियों का उत्पादन हो रहा है। किसान अब पारंपरिक खेती के साथ-साथ वैज्ञानिक तरीके से मछली पालन अपना रहे हैं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत हो रही है।

​स्थानीय बाजार से लेकर दूसरे जिलों तक भारी डिमांड

महराजगंज में पैदा होने वाली मछलियों की मांग सिर्फ स्थानीय बाजार तक ही सीमित नहीं है। यहां की मछलियां भारी मात्रा में झांसी, मऊ, आजमगढ़ और बलिया समेत कई अन्य जिलों में सप्लाई की जा रही हैं। इस बढ़ते व्यापार से सिर्फ किसानों को ही नहीं, बल्कि मछली विक्रेताओं और ट्रांसपोर्ट से जुड़े कारोबारियों को भी बड़ा आर्थिक लाभ मिल रहा है।

​किसानों और युवाओं को मिल रहा विभागीय सहयोग

जिले में मछली पालन के प्रति किसानों और खासकर युवाओं का रुझान तेजी से बढ़ा है। जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि मत्स्य विभाग की ओर से मछली पालकों को आधुनिक व तकनीकी जानकारी, जरूरी प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।