Gorakhpur News: सुमेर सागर में कूड़ा जलाने के बाद नगर निगम सख्त, 8 स्थानों पर चेतावनी बोर्ड, सफाई अभियान तेज
गोरखपुर | 28 अक्टूबर 2026 | दैनिक गोरखपुर
गोरखपुर समाचार: शहर के ऐतिहासिक जलस्रोत सुमेर सागर की बदहाल स्थिति और कूड़ा जलाने की घटना के बाद नगर निगम ने संरक्षण की दिशा में कार्रवाई तेज कर दी है। जलस्रोत के आसपास आठ स्थानों पर चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं। इसके साथ ही परिसर में जमा कचरे और निर्माण सामग्री को हटाने का अभियान चलाया जा रहा है।
नगर निगम की इस कार्रवाई से सुमेर सागर के संरक्षण की उम्मीद बढ़ी है। हालांकि, वर्षों से उपेक्षित इस जलस्रोत के स्थायी विकास को लेकर अभी कई सवाल बने हुए हैं।
कूड़े में आग लगने से बढ़ी परेशानी
27 अक्टूबर को सुमेर सागर क्षेत्र में जमा कचरे में आग लगने से आसपास धुआं फैल गया। इससे स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
घटना के बाद नगर निगम ने मंगलवार रात आठ अलग-अलग स्थानों पर बोर्ड लगवाए। इन बोर्डों के माध्यम से स्पष्ट किया गया है कि सुमेर सागर एक जलीय क्षेत्र है और यहां कूड़ा-कचरा या मलबा फेंकने पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
सफाई अभियान में हटाया गया 20 डंपर से अधिक मलबा
सुमेर सागर की सफाई के लिए शनिवार से विशेष अभियान चलाया जा रहा है।
इस अभियान में अब तक 20 डंपर से अधिक मिट्टी, कचरा और मलबा हटाया जा चुका है। सफाई कार्य में दो जेसीबी मशीनों और चार हाईवा डंपरों का उपयोग किया जा रहा है।
नगर निगम के सहायक नगर आयुक्त तपन मिश्रा और सफाई निरीक्षक राज विजय की निगरानी में यह कार्य कराया जा रहा है।
कूड़ा फेंकने वालों पर एफआईआर की तैयारी
नगर आयुक्त अजय जैन ने सुमेर सागर में अवैध रूप से कचरा और निर्माण सामग्री डालने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात कही है।
इसके अतिरिक्त जलस्रोत के विकास के लिए कानूनी पहलुओं पर विचार करते हुए नई योजना तैयार करने की बात भी सामने आई है।
हालांकि, चेतावनी बोर्ड लगाने के साथ नियमित निगरानी और कचरा फेंकने की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना भी आवश्यक होगा।
27 करोड़ रुपये की पर्यटन परियोजना अब तक अधूरी
गोरखपुर के विजय चौक और धर्मशाला बाजार मार्ग के पास स्थित सुमेर सागर लगभग 18.5 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है।
सितंबर 2023 में इसे पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए लगभग 27 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की गई थी।
इस योजना में कई आकर्षक सुविधाओं का प्रस्ताव था, जिनमें शामिल थे:
- म्यूजिकल फाउंटेन
- फूड कोर्ट
- लगभग 1.437 किलोमीटर लंबा जॉगिंग ट्रैक
- पर्यटन के लिए सार्वजनिक सुविधाओं का विकास
परियोजना के लिए निर्माण एजेंसी का चयन होने और प्रारंभिक सफाई कार्य शुरू किए जाने के बावजूद योजना अपेक्षित गति नहीं पकड़ सकी।
अतिक्रमण हटने के बाद भी नहीं बदली तस्वीर
वर्ष 2020 में जिला प्रशासन ने सुमेर सागर की 10 एकड़ से अधिक भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया था।
इसके बावजूद समय बीतने के साथ जलस्रोत के आसपास दोबारा कचरा और मलबा जमा होने लगा।
अब प्रशासन के सामने केवल सफाई कराना ही नहीं, बल्कि इस क्षेत्र को भविष्य में अवैध डंपिंग से सुरक्षित रखना भी बड़ी चुनौती है।
जल संरक्षण और जलभराव से जुड़ा है सुमेर सागर का महत्व
सुमेर सागर का संरक्षण शहर के पर्यावरण के लिए भी महत्वपूर्ण है। तालाब और प्राकृतिक जलस्रोत बारिश के पानी को संग्रहित करने तथा भूजल स्तर बनाए रखने में सहायक होते हैं।
पर्यावरण संरक्षण से जुड़े लोगों ने भी ऐसे जलस्रोतों को बचाने की आवश्यकता पर जोर दिया है।
सुमेर सागर का प्रभावी संरक्षण शहर की जलनिकासी व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में भी उपयोगी साबित हो सकता है।
क्या अब बदलेगी सुमेर सागर की स्थिति?
नगर निगम द्वारा चेतावनी बोर्ड लगाना और सफाई अभियान चलाना महत्वपूर्ण पहल है। लेकिन जलस्रोत की स्थिति में स्थायी सुधार के लिए नियमित निगरानी, अवैध डंपिंग पर कार्रवाई और लंबे समय से लंबित विकास परियोजना को आगे बढ़ाना जरूरी होगा।
अब देखना होगा कि सुमेर सागर को पर्यटन और पर्यावरण संरक्षण के केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना कब धरातल पर उतरती है।
स्रोत: हिन्दुस्तान, 28 अक्टूबर 2026। उपलब्ध रिपोर्ट के तथ्यों के आधार पर दैनिक गोरखपुर के लिए स्वतंत्र रूप से तैयार समाचार।
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