दैनिक गोरखपुर
उत्तर प्रदेश

यूपी शासन का बड़ा फैसला: प्रदेश के सभी 75 जिलों के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में 24 घंटे फ्री इमरजेंसी दवाएं और जांच अनिवार्य, बिना ठोस कारण रेफर करने पर नपेंगे डॉक्टर

✍️ दैनिक गोरखपुर सिस्टम 📅 प्रकाशित: 9/9/2026
यूपी शासन का बड़ा फैसला: प्रदेश के सभी 75 जिलों के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में 24 घंटे फ्री इमरजेंसी दवाएं और जांच अनिवार्य, बिना ठोस कारण रेफर करने पर नपेंगे डॉक्टर

उत्तर प्रदेश चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिला अस्पतालों, संयुक्त चिकित्सालयों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और राजकीय मेडिकल कॉलेजों के लिए नई आपातकालीन स्वास्थ्य नियमावली लागू कर दी है। इसके तहत सभी अस्पतालों में 100 आवश्यक इमरजेंसी दवाओं, एंटी-वेनम, रैबीज वैक्सीन, ऑक्सीजन और बुनियादी डायग्नोस्टिक जांचों (सीटी स्कैन, एक्स-रे, ईसीजी, ब्लड टेस्ट) को 24 घंटे मुफ्त उपलब्ध कराना अनिवार्य कर दिया गया है। शासन ने कड़ा निर्देश दिया है कि किसी भी गंभीर मरीज को बिना प्रारंभिक उपचार और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) के लिखित अनुमति के हायर सेंटर रेफर नहीं किया जाएगा।

यूपी स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार: 24 घंटे मुफ्त इमरजेंसी दवाएं, बिना ठोस कारण मरीज रेफर करने पर डॉक्टरों पर कार्रवाई **दैनिक गोरखपुर ब्यूरो, लखनऊ:** प्रदेश के गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को उच्चस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं सुलभ कराने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश शासन ने स्वास्थ्य ढांचे को पूरी तरह चाक-चौबंद करने के आदेश जारी किए हैं। उप मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक तथा प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य ने सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को शासनादेश का तत्काल अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। --- शासनादेश के मुख्य प्रावधान (Key Mandates): 1. **100 आपातकालीन दवाइयों की जीरो शॉर्टेज:** सभी इमरजेंसी वार्डों में जीवनरक्षक दवाएं (हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, अस्थमा, शॉक, सर्पदंश और दुर्घटना ट्रॉमा) की 100% उपलब्धता रहेगी। दवा बाहर से मंगाने पर संबंधित ड्यूटी डॉक्टर के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई होगी। 2. **रेफरल ऑडिट सिस्टम लागू:** जिला अस्पताल या मेडिकल कॉलेज से किसी मरीज को लखनऊ केजीएमयू, पीजीआई या एम्स रेफर करने से पहले मरीज को स्थिर (Stabilize) करना अनिवार्य होगा। साथ ही रेफरल पर्ची पर रेफर करने का स्पष्ट चिकित्सकीय कारण और सीएमएस के हस्ताक्षर अनिवार्य होंगे। प्रत्येक महीने रेफरल मामलों का राज्य स्तरीय ऑडिट होगा। 3. **'ई-संजीवनी' टेली-कंसल्टेशन से जुड़ेंगे 20,000 वेलनेस सेंटर:** ग्रामीण क्षेत्रों के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर तैनात सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) सीधे जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के स्पेशलिस्ट डॉक्टरों से वीडियो कंसल्टेशन कर मरीजों को दवा परामर्श देंगे। 4. **डिजिटल टोकन व 15 मिनट में इमरजेंसी एडमिशन:** ट्रॉमा सेंटर और इमरजेंसी में आने वाले हर मरीज का 15 मिनट के अंदर ट्राइएज (Triage) वर्गीकरण कर प्राथमिक उपचार शुरू किया जाएगा। परिजनों को बेड या स्ट्रेचर के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। --- पूर्वांचल के अस्पतालों में विशेष निगरानी: गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज, एम्स गोरखपुर, जिला चिकित्सालय (सदर), महराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती और सिद्धार्थनगर मेडिकल कॉलेजों में नोडल अधिकारियों की तैनाती कर दी गई है। कंट्रोल रूम के जरिए सीसीटीवी और दवाओं की उपलब्धता की लाइव मॉनिटरिंग की जा रही है। --- मुख्य बिंदु (Key Highlights): - **लागू क्षेत्र:** प्रदेश के सभी 75 जिले (पीएचसी, सीएचसी, जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज) - **मुफ्त सेवाएं:** 100 जीवनरक्षक दवाएं, सीटी स्कैन, एक्स-रे, पैथोलॉजी और ऑक्सीजन - **रेफरल नियम:** बिना सीएमएस की मंजूरी और स्टेबलाइजेशन के मरीज रेफर करने पर प्रतिबंध - **हेल्पलाइन:** दवाओं की कमी या शिकायत पर 1075 व 1800-180-5145 पर तुरंत दर्ज कराएं शिकायत