राप्ती व रोहिन नदी के संगम तट पर भव्य ‘राप्ती महाआरती’: हरिद्वार और काशी की तर्ज पर प्रतिदिन जुट रहे हजारों श्रद्धालु
✍️ राकेश मणि शुक्ला
📅 प्रकाशित: 1/9/2026
शाम ढलते ही राप्ती के पावन तट पर गूंजते हैं वैदिक मंत्र। जल प्रदूषण मुक्ति के लिए 'निर्मल राप्ती संकल्प' ले रहे हैं भक्त।
गोरखपुर महानगर के ऐतिहासिक राजघाट पर राप्ती और रोहिन नदी के संगम तट पर आयोजित होने वाली दैनिक 'श्री राप्ती महाआरती' अब काशी के दशाश्वमेध और हरिद्वार के हर की पौड़ी जैसी भव्यता और दिव्यता बिखेर रही है।
**11 बटुकों द्वारा 108 दीपों की वैदिक आरती:**
संध्या 6:30 बजे गंगा सेवा निधि के प्रशिक्षित वैदिक आचार्यों द्वारा शंखध्वनि, घंटा-घड़ियाल और डमरू वादन के साथ राप्ती मैया की पंचोपचार पूजा और भव्य आरती संपन्न की जाती है। आरती के समय नदी की जलधारा में तैरते हजारों दीप अलौकिक दृश्य प्रस्तुत करते हैं।
**पक्के रिवरफ्रंट और लेजर साउंड शो:**
नगर निगम ने राजघाट से लेकर बहरामपुर तक 2 किलोमीटर लंबा सुंदर पक्का रिवरफ्रंट, वॉकवे और बैठने के लिए बेंचें स्थापित की हैं। आरती के पश्चात राप्ती के इतिहास और गुरु गोरखनाथ की कथा का 20 मिनट का लेजर शो दिखाया जाता है।