गोरखपुर टेराकोटा शिल्पकारों को मिली अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर सीधी एंट्री, 5000 परिवारों की बढ़ी आमदनी
✍️ प्रवीण कुमार वर्मा
📅 प्रकाशित: 1/9/2026
गोरखपुर के औरंगाबाद और गुलरिहा के टेराकोटा हस्तशिल्पियों के उत्पाद अब अमेजन और अंतरराष्ट्रीय मार्केटप्लेस पर बिक रहे हैं। आय में दोगुना उछाल।
उत्तर प्रदेश सरकार की 'एक जिला एक उत्पाद' (ODOP) योजना के तहत गोरखपुर के विश्व प्रसिद्ध टेराकोटा शिल्प ने वैश्विक फलक पर अपनी अमिट छाप छोड़ी है। औरंगाबाद, भरवलिया और लंगड़ी गुलरिहा गांव के 400 से अधिक पारंपरिक शिल्पकारों के समूहों को सीधे अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स पोर्टल्स से जोड़ा गया है।
**मिट्टी के बर्तन और सजावटी मूर्तियों की भारी मांग:**
प्राकृतिक लाल मिट्टी से बनी हाथी, घोड़े, लैंपशेड और वॉल हैंगिंग्स की मांग अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और खाड़ी देशों में तेजी से बढ़ी है। शिल्पकारों को आधुनिक पैकेजिंग और ऑनलाइन ऑर्डर पूर्ति की निशुल्क ट्रेनिंग दी गई है।
**जीआई टैग से मिली वैश्विक पहचान:**
जिला उद्योग केंद्र (DIC) के उपायुक्त ने बताया कि टेराकोटा शिल्प को मिले जीआई (GI) टैग के कारण विदेशी खरीदार सीधे असली कारीगरों से संपर्क कर रहे हैं। बिचौलियों की समाप्ति से शिल्पकारों की मासिक आमदनी में 80 से 100 प्रतिशत की ऐतिहासिक वृद्धि दर्ज की गई है।