गोरखपुर जिला कारागार में आधुनिक ‘ई-प्रिजन व स्किल रिफॉर्म’ मॉडल लागू: 800 बंदियों ने सीखी एलईडी बल्ब व बेकरी निर्माण की कला
✍️ सुनील कुमार सिंह
📅 प्रकाशित: 1/9/2026
सजा पूरी होने के बाद समाज की मुख्यधारा में लौटने की अनूठी पहल। कैदियों द्वारा तैयार उत्पाद 'गोरखपुर जेल ब्रांड' के नाम से स्थानीय बाजारों में उपलब्ध।
गोरखपुर जिला कारागार अब केवल एक दंडात्मक संस्थान नहीं, बल्कि सकारात्मक सुधार और कौशल निर्माण के एक प्रमुख केंद्र में तब्दील हो चुका है। जेल प्रशासन द्वारा शुरू किए गए 'कौशल विकास एवं पुनर्वास मिशन' के तहत 800 से अधिक बंदियों को तकनीकी और वोकेशनल ट्रेडों में दक्ष बनाया गया है।
**एलईडी बल्ब, अगरबत्ती और शुद्ध बेकरी प्रोडक्ट्स:**
जेल परिसर में स्थापित कार्यशालाओं में कैदी उच्च गुणवत्ता के एलईडी बल्ब, हर्बल अगरबत्ती, सूती गमछे और बेकरी उत्पाद तैयार कर रहे हैं। इन उत्पादों की बिक्री से मिलने वाला लाभांश सीधे कैदियों के बैंक खातों में जमा किया जा रहा है, जिसे वे अपने परिजनों को भेज रहे हैं।
**ई-मुलाकात और डिजिटल लीगल एड:**
जेल में ई-प्रिजन पोर्टल के माध्यम से परिजनों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग द्वारा मुलाकात की सुविधा दी जा रही है। साथ ही निर्धन बंदियों को समय पर जमानत दिलाने के लिए डिजिटल लीगल एड क्लिनिक भी सुचारू रूप से कार्य कर रहा है।