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गोरखपुर डेयरी उद्योग में क्रांति: बनास (अमूल) और पराग के आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट से 50 हजार पशुपालकों की आय दोगुनी

✍️ प्रवीण कुमार वर्मा 📅 प्रकाशित: 1/9/2026
गोरखपुर डेयरी उद्योग में क्रांति: बनास (अमूल) और पराग के आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट से 50 हजार पशुपालकों की आय दोगुनी

पूर्वांचल में श्वेत क्रांति का नया अध्याय। ऑटोमैटिक फैट टेस्टिंग और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) से बिचौलियों का खेल पूरी तरह खत्म।

गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) में स्थापित ₹300 करोड़ की लागत वाले अत्याधुनिक 'बनास डेयरी (अमूल) एवं पराग मिल्क प्रोसेसिंग कॉम्प्लेक्स' ने पूर्वांचल के ग्रामीण अंचल में आर्थिक स्वावलंबन और श्वेत क्रांति की नई इबारत लिख दी है। **प्रतिदिन 5 लाख लीटर दूध का प्रसंस्करण:** संयंत्र में गोरखपुर, महराजगंज, देवरिया, कुशीनगर और बस्ती के 1,200 ग्रामीण दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों से प्रतिदिन 5 लाख लीटर से अधिक ताजा गाय व भैंस का दूध संकलित कर पाश्चुरीकृत दूध, पनीर, मक्खन, घी, आइसक्रीम और छाछ का निर्माण किया जा रहा है। **पशुपालकों के खाते में हर 10वें दिन भुगतान:** गांव-गांव स्थापित डिजिटल बल्क मिल्क कूलर्स (BMC) पर कम्प्यूटरीकृत मशीनों द्वारा दूध की गुणवत्ता और फैट की जांच होती है और पर्ची के अनुसार राशि सीधे पशुपालक किसान के बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की जाती है।