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पवित्र एकादशी व्रत व तुलसी विवाह विधि: पूर्वांचल के घरों में पारंपरिक विधि से हुआ अनुष्ठान, गन्ने के मंडप में गूंजे मंगल गीत

✍️ प्रिया त्रिपाठी 📅 प्रकाशित: 1/9/2026
पवित्र एकादशी व्रत व तुलसी विवाह विधि: पूर्वांचल के घरों में पारंपरिक विधि से हुआ अनुष्ठान, गन्ने के मंडप में गूंजे मंगल गीत

चार माह के योग निद्रा के बाद जागे भगवान श्रीहरि विष्णु। घरों के आंगनों में सजे गन्ने के मंडप, सिंघाड़े, शकरकंद और मौसमी फलों का भोग लगा।

पूर्वांचल के गांव-गांव और शहरों में देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी का पावन पर्व अत्यंत श्रद्धा, उल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया। इसके साथ ही पिछले चार महीनों से रुके हुए विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे समस्त मांगलिक कार्य प्रारंभ हो गए हैं। **गन्ने का मंडप और शालिग्राम-तुलसी का विवाह:** घरों के आंगनों और छतों पर गन्ने के खंभों से सुंदर मंडप बनाए गए। महिलाओं ने आंगन में गाय के गोबर और चावल के लेप से सुंदर चौक (अल्पना) बनाकर भगवान विष्णु के विग्रह शालिग्राम जी और तुलसी जी का वैदिक मंत्रोच्चार और सोहर-मंगल गीतों के बीच विधिपूर्वक पाणिग्रहण संस्कार संपन्न कराया। **दीयों की जगमगाहट और आतिशबाजी:** शाम होते ही श्रद्धालुओं ने अपने घरों, मंदिरों, कुओं और तुलसी चौराहों पर 11-11 दीपक प्रज्वलित किए। मिठाइयों और मौसमी कंदमूल का प्रसाद वितरित किया गया।