आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बदल रही खेती: गोरखपुर के किसानों ने लगाया ‘स्मार्ट सॉइल सेंसर’, 30% पानी की बचत और 25% अधिक उपज
✍️ सौरभ श्रीवास्तव
📅 प्रकाशित: 1/9/2026
डिजिटल खेती से समृद्ध हो रहे पूर्वांचल के अन्नदाता। फसलों में कब और कितना पानी या खाद देना है, इसका सटीक अलर्ट व्हाट्सएप पर मिल रहा है।
गोरखपुर जनपद के पिपराइच और भटहट विकास खंड के 500 प्रगतिशील किसानों ने अपने धान और गन्ने के खेतों में इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित 'स्मार्ट सॉइल सेंसर्स' लगाकर आधुनिक सटीक खेती (Precision Farming) की मिसाल कायम की है।
**जमीन के अंदर 1 फीट गहराई पर नमी और पोषक तत्वों की माप:**
सौर ऊर्जा से चलने वाले ये स्वदेशी सेंसर्स हर 30 मिनट में मिट्टी की नमी, तापमान, नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश (NPK) और पीएच स्तर का रियल-टाइम डेटा क्लाउड सर्वर पर भेजते हैं। एआई इंजन इस डेटा का विश्लेषण कर किसान के मोबाइल पर स्थानीय भोजपुरी और हिंदी में ऑटोमैटिक वॉइस मैसेज भेजता है।
**पानी और यूरिया की बर्बादी पूरी तरह रुकी:**
किसानों का कहना है कि पहले वे अनुमान के आधार पर जरूरत से ज्यादा ट्यूबवेल चलाते थे और यूरिया छिड़कते थे। अब सेंसर द्वारा बताए गए समय पर सिंचाई करने से बिजली और डीजल का खर्च 30% घटा है और फसल की पैदावार में 25% का इजाफा हुआ है।